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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 358, कुल 440 में से

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पृष्ठ 358

३४८ असली कोकशास्त्र
२—गुलरोगन को जरा सा गरम करके पेट पर मल देने से भी
भी पेट की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
३—नमक को खूब महीन पीसकर गरम करे और उसे बालक
के पेट पर मले। खूब महीन नमक रहे, नहीं तो बालक के पेट का
चमड़ा छिल जायगा और उसे महान दुःख होगा ।
४—छोटो इलाइची को दो बीज, सौंफ के दो दाने, माँ के दूध में
पीसकर पिला देने से भी पेट का दर्द मिट जाता है ।
सो कर उठने पर यदि बालक रोने लगे, जीभ निकाले और
इधर-उधर दूध की खोज में माथा हिलावे तो समझना चाहिए कि
बच्चा भूखा है ।
अधिक देर तक एक ही करवट के बल सोने से या किसी वस्तु
के चुभने, चींटी अथवा मच्छर के काटने से भी बच्चा रोने लगता
है । इस लिए सबसे पहले इन बातों का निरीक्षण भली प्रकार कर
लेना आवश्यक है ।
यदि बालक बराबर रोता ही रहे, चुप न हो, तो जानना चाहिए
कि उसे कोई दुख हो रहा है । जहाँ या जिस अंग में पीड़ा होती
रहती है, बालक बार-बार उसी को छूता है ओर दूसरे का उस
स्थान पर हाथ लगने से रोता है ।
मस्तक में पीड़ा होने पर बच्चा अपनी आँखें मूँद लेता है ।
गुदा में दर्द होने पर बच्चे को प्यास अधिक लगती है । साथ ही
मूर्च्छा भी हो जाती है मलकोष्ठ में दर्द होने पर मल-मूत्र रुक