रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३४७
पीपल, पीपलामूल और कटेरी का क्वाथ बनाकर फिर उसे घी
में पकावे। जब सब पानी जल जाय और घी रह जाय, तब उसे
उतार कर किसी बर्तन में रख ले और वही घी बालक के शरीर में
मलकर उसे स्नान करावे।
यदि बालक रोने लगे, तब समझना चाहिए कि उसे किसी
प्रकार का कष्ट हो रहा है। बड़े लड़के तो अपना दुःख-सुख कुछ
कह सुनाते हें, पर छोटे लड़के न बोल सकने के कारण अपने दुःखों
को रोकर ही जाहिर करते हैं। बालक के दुःखों को जानने की
रीति यह है:—
यदि बालक रोता हो, मुख में झारा आती हो, तो जानना
चाहिए कि उसके कपड़ों में जूँ है और उसीक काटने से बच्चा रो
रहा है। फिर उसको ढूँढ़कर निकाल डालना चाहिए। और बच्चे
के शरीर में जहाँ-जहाँ उसने काट खाया हो, वहाँ-वहाँ जरा घी
मल देना चाहिए। तुरन्त बालक चुप हो जायगा।
यदि बालक बार-बार अपने पैरों को पेट की ओर समेटे और
पेट को दबाने से प्रसन्न न हो. रोता ही रहे तो समझना चाहिए
कि उसके पेट में दर्द है। पेट-दर्द दूर करने के लिए निम्न-लिखित
उपाय काम में लाना चाहिए:—
१—हाथ को आग पर सेंक-सेंक कर सहता हुआ बालक का
पेट सेंके। इस बात का ध्यान रहे कि बच्चे का शरीर बहुत ही
कोमल होता है। अधिक गरम हाथ पड़ने से कहीं जल न जाय।