रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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कर डाली जाय ।
४—सूतिका को भोजन पीछे के लिखे अनुसार दिया जाय
और बच्चे को बासी दूध कभी न पिलाया जाय ।
इन्हीं बातों पर ध्यान न देने के कारण बालकों को बहुधा ये
रोग हो जाते हैं:—
उनका शरीर शिथिल पड़ जाता है और नींद नहीं आती दस्त
पतले होने लगते है। बार-बार दूध डाल देते हैं; वे स्तन-पान नहीं
करते। हिचकी, खाँसी, अतिसार, उल्टी, ज्वर आदि रोग हो जाते
हैं। रंग पीला पड़ जाता है, कम्प होता है, गले में घरघराहट होता
है, शरीर में दुर्गन्ध पैदा हो जाती है। मूर्ख-स्त्री-पुरुष इनको भूत-प्रेत
का उपद्रव जानकर झाँड़-फूँक कराने लगते हैं।
बालक को स्वस्थ और निरोग रखने का सहज उपाय यही है
कि जन्मते ही उसकी हर प्रकार की सफाई पर पूरा-पूरा ध्यान
रक्खा जाय और नीचे लिखे काढ़ों से पाँचवें-सातवें दिन उसे
नहला दिया करे ।
गोरखमुण्डी और खस को पानी में पका डाले। बाद ठण्डा हो
जाने पर (विशेष जलने न लगे) छानकर उसी जल से स्नान
करावे। उसके अंगों को खूब हल्के हाथ से धो दे, जिसमें मैल न
लगी रह जाय ।
हल्दी, चन्दन, कूट उनको पीसकर उबटन की भाँति बालक के
शरीर पर लगाकर छुड़ा दे, फिर स्नान करावे ।