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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 355, कुल 440 में से

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पृष्ठ 355

असली कोकशास्त्र ३४५
टोना , नजर, ग्रह, भूत, प्रेत आदि के भ्रम में पड़ जाती हैं । परि-
णाम यह होता है कि ठीक उपचार न होने के कारण वे बच्चे से
हाथ धो बैठती हैं । भला भूख लगी हो और कै होने की दवा दी जाय,
यह कहाँ की बुद्धिमानी है ? हमारे देश में ऐसे ही अट-सट यत्न
किये जाते हैं । किन्तु यह बात उचित नहीं है । सुश्रुत आदि मह-
र्षियों ने स्पष्ट लिखा है कि किसी प्रकार के असुख का मूल कारण
जानकर उसकी दवा करनी चाहिए । सब रोग औषधियों से ही
शान्त होते हैं ।
सुश्रुत संहिता में लिखा है कि अधिकार अपवित्रता के कारण
ही बच्चे रोग के शिकार बनते हैं । कारण यह कि उसका स्वभाव
अत्यन्त सुकुमार होता है, अतएव मामूली गन्दगी भी उनके रोग
का कारण हो जाती है । इसीसे आचार्यों ने इस बात पर बारम्बार
जोर दिया है कि बच्चों की सफाई की ओर पूरा ध्यान रखना
चाहिए । सौर में नीचे लिखी बातों पर यदि ध्यान रक्खा जाय तो
बच्चे जल्द बीमार नहीं पड़ सकते ।
१—गन्दी हवा न जाने दे तथा सोर के घर में किसी प्रकार
की गन्दगी न करे । शुद्ध वायु को रोके भी न
२—बहुत ही सावधानी से नालोच्छेदन किया जाय, ताकि
उसमें कोई रोग उत्पन्न होने की सम्भावना न रहे ।
३—बालक पैदा होने के बाद ही उसको एक दस्त कराया
जाय और उसके अंग-प्रत्यङ्ग की सफाई बहुत ही सावधानी से