रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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भी बाहर निकल आती है। खूनी में मनुष्य निर्बल बहुत हो जाता
है, परन्तु बादी की अपेक्षा इसमें पीड़ा कम होती है। दोनों तरह
के बवासीर होने के मूल कारण हैं, कब्ज रहना, अधिक बैठना,
तिक्त और गरिष्ठ चीजें खाना तथा खाने-पीने और मल-त्याग आदि
में व्यतिक्रम करना।
सूजे हुए मस्सौं के लिए अखरोट के तेल में रुई भिगोकर गुदा
में रखना लाभदायक है। इससे मस्से जल जाते हैं और इस रोग
से छुटकारा मिलता है।
गेंदे की पत्ती, काली मिर्च के साथ घोंटकर पीने से भी
बवासीर अच्छा हो जाता है।
थूहर-वृक्ष का दूध ६ छटाँक और हल्दी ३ छटाँक, इन दोनों
को बारीक पीसकर मरहम बना लेना चाहिए। अर्श रोगी मंगल
से शुक्रवार तक, यानी चारो दिन इसी का लेप करे तो नयी पुरानी
बवासीर नष्ट हो जाता है। बवासीर की यों तो सैकड़ों ओषधियाँ
वैद्यक ग्रन्थों में लिखा हैं, पर परीक्षित न होने के कारण व्यर्थ
उनका यहाँ उल्लेख करना हम उचित नहीं समझते।
अस्तु; खास रोगों की कुछ ओषधियाँ लिख दी गयीं। अब
इस प्रकरण को समाप्त करके आगे के प्रकरण में बच्चों के सम्बन्ध
में काम की बातें लिखी जायँगी।
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