सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 352, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 352

३४४ असली कोकशास्त्र
बालरोग चिकित्सा
माता की लापरवाही या मूर्खता के कारण बच्चे बहुधा रोग-
ग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी मर भी जाते हैं। इस लिए इस
प्रकरण में साधारण घरेलू चिकित्सा की मोटा-मोटी बातें लिख
देना माताओं के लिए बहुत ही उपयोगी होना सम्भव है । यद्यपि
बालक के रोगों की चिकित्सा करना बड़ा ही असाधारण काम है
और वह हम लोगों के समान मनुष्यों का काम भी नहीं है तथापि
यह विषय इस पुस्तक का मुख्य अंग होने के कारण प्राचीन ग्रन्थों
के आधार पर कुछ बातें लिखी जा रही हैं ।
सबसे पहले बालक का रोग समझना आवश्यक होता है ।
आयुर्वेद शास्त्र में दो खण्ड हैं; एक निदान खण्ड है और दूसरे का
नाम चिकित्सा खण्ड है । निदान खण्ड में रोग पहचानने की
विधियाँ, रोगों के लक्षण आदि हैं और चिकित्सा खण्ड में रोगों
के प्रतिकार के उपाय बतलाये गये हैं । आयुर्वेद की इस प्रणाली
से मालूम होता है कि पहले निदान है और पीछे चिकित्सा । ऐसे
भी देखने से निदान ही पहली वस्तु मालूम होती है । यदि यही न
मालूम होगा कि रोग क्या चीज है, तो फिर इलाज क्या किया जा
सकता है ? इस लिए माताओं का कर्तव्य है कि पहले वे बच्चे का
रोग खूब सावधानी से जानने की चेष्टा करें। आजकल की मातायें
बहुधा बच्चों के बीमार पड़ते ही दवा देने की ओर ध्यान न देकर