रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४० असली कोकशास्त्र
धुँधला दिखलायी पड़ता हो तो शाम को मिट्टी के नये बर्त्तन में
कुएँ का पानी छानकर रख दे और तड़के उठकर शौचादि से निवृत्त
हो, उसी जल से आँखों पर खूब छींटा लगावे । कम से कम दो-
तीन सेर पानी का छींटा लगाना जरूरी है। घड़ा प्रतिदिन बदलने
की आवश्यकता नहीं। महीने भर के सेवन से नेत्र निरोग हो जाते
हैं और ज्योति भी ठीक हो जाती है। यह दवा हमारी आजमायी
हुई है।
रतौंधी होने पर गाय का घी, मिश्री और काली मिर्च का नित्य
सबेरे सेवन करना चाहिए। यह रोग निर्बलता के कारण मस्तक में
आयी हुई कमजोरी से उत्पन्न होता है; अतः मस्तक की पुष्टि का
इलाज करने से यह रोग दूर होता है। देशी स्याही दवात में से
निकाल कर तीन-चार दिन अंजन लगाने से भी रतौंधी बन्द हो जाती
है। या पान के रस की तीन-चार बूँदें आँखों में टपका देने के
बाद साफ पानी से धो डालने पर भी यह रोग दूर हो जाता है। यह
दवा कम से कम दस-बारह दिन में काम करती है, घबड़ा कर
छोड़ नहीं देना चाहिए ।
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