रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३३६
यदि थनैला हो जाय तो नागरमोथा और मेथी को बकरी के
दूध में पीसकर लगाना चाहिए । या रेंडी के पते का रस निकाल
कर उसमें कपड़ा भिगो भिगोकर बारम्बार लगाना चाहिए ।
अथवा गुलाब की पत्ती, सेब की पत्ती, मेंहदी की पत्ती और अनार
की पत्ती बराबर-बराबर लेकर खूब बारीक पीस डाले और आग
पर किंचित् गरम करके दिन भर में चार-पाँच बार स्तनों पर
लगाया करे । या सहिजन के पत्त पीसकर लेप किया करे ।
यदि स्तन तड़क गये हों या स्तनों में पीड़ा हो तो ग्लैसरिन
लगा देना चाहिए । अथवा घी में मोम मिलाकर लगा देना चाहिए
अथवा सुहागा दो तोले, गेहूँ का सत सात तोले, पीस-छानकर
स्तन पर मल दे । इस दवा से बालक के मुख में पड़े हुए फफोले
भी जाते रहते हैं ।
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नेत्र रोग
आँखें लाल रहती हों तो छः माशे बकरी के दूध में चार रत्ती
अफीम पीसकर नेत्र के ऊपर लगाना उचित है; किन्तु यह भीतर
जरा भी न जाने पावे, नहीं तो बड़ा कष्ट होगा । या दो रत्ती फिट-
किरी को एक तोले पानी में पीसकर चार-पाँच बूँद आँखों में सुबह-
शाम टपका दिया करे । इससे भी लालिमा मिट जाती है ।
यदि आँखों से पानी गिरता हो और किसी-किसी समय