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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 349, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ३४१
कान्तिबर्द्धक उबटन
पीली सरसो एक सेर, सफेद चन्दन का चूर्ण एक छटाँक,
बालछड़ एक छड़, नेत्रवाला आधी छटाँक, आम की छाल एक
छटाँक, केशर रुपये भर, चिरौंजी तीन छटाँक, इन सबको कूट-
छानकर रक्खे ओर इसे थोड़ा सा लेकर दुध में पीसकर शरीर में
लगाया करे। इस उबटन से शरीर सुगन्धित रहता है, कांति बढ़ती
है, स्वच्छता रहती है ओर शीघ्र कोई चर्म-जन्य रोग नहीं होता।
—०—
फोड़ा-फुन्सी
रक्त-विकार से ही शरीर में फोड़े-फुन्सियों का निकलना शुरू
होता है। इस लिए सबसे उत्तम बात तो यह है कि रक्त को ही
शुद्ध करने की चेष्टा करनी चाहिए। रक्त के शुद्ध हो जाने पर फोड़े
फुन्सियों की जड़ ही कट जाती है। इसे शुद्ध करने का सबसे सरल
ओर उत्तम उपाय तो यह है कि कोष्ठ-शुद्धि पर विशेष ध्यान रक्खे;
क्योंकि पेट को गड़बड़ी से ही सारे रोगों की उत्पत्ति होती है;
भोजन हल्का, शुद्ध और पचने पर करे। इससे रक्त धीरे-धीरे शुद्ध
हो जाता है। अथवा इसे करते हुए चैत के महीने में शुद्ध मधु का
एक महीना सेवन करे। या उसी महीने में नीम की मुलायम पत्ती
खाकर ऊपर से गाय का धारोष्ण दुध पिये और खट्टी-मीठी तथा