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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 346, कुल 440 में से

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३३८ असली कोकशास्त्र
दिन अपने स्तनों का दूध निचोड़ कर गिरा दिया करे । क्योंकि
स्तन में दूध रह जाने से स्तन पक जाते तथा और भी अनेक तरह
के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। जब दूध स्तन में रह जाता है, तब
माता को बड़ा ही कष्ट होता है। अतएव इसके निचोड़ने में
ढिलाई नहीं करनी चाहिए ।
अब हम दूषित दूध को शुद्ध करने का कुछ यत्न बतलाते हैं ।
मूँग का जूस पीना चाहिए । अथवा भारंगी, दारुहल्दी, वच,
अतीस तीन-तीन माशे पानी में घोटकर पिये । या पाढ़, मूर्वा,
मोथा, चिरायता, देवदारु, इन्द्रजव, कुटकी, इनका काढ़ा पिया करे ।
—०—
थनैला
जो स्त्रियाँ बालकों को दूध पिलाती हैं, उनके स्तनों में कई
कारणों से गाँठ पड़कर फोड़े हो जाते हैं और स्तन पक जाते हैं ।
जैसे, बालक के सिर की चोट लग जाने से गाँठ पड़ जाती है ।
स्तन गीले रहने से फट जाते हैं । रुधिर खराब होने से फोड़ा
निकल आता है । इस लिए यदि बालक के सिर की चोट लग
जाय तो गरम पानी में रुई डालकर सहने लायक गरम रहने पर
धीरे-धीरे सेंक देना चाहिए । स्तनों को गीला न रखना चाहिए ।
यह रोग बड़ा ही कष्टदायक होता है, अतः पहले से ही इसका
इलाज करना चाहिए ।