रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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इसका सबसे उत्तम और सरल उपाय यही है कि गर्भाशय को
ठीक करके शुद्ध कर देना चाहिए। यदि रजोधर्म ठीक समय पर न
होता हो तो उसका यत्न करना भी आवश्यक है। यह रोग कभी-
कभी अविवाहिता कन्याओं को भी हो जाता है, किन्तु बहुधा यह
रोग ऐसी स्त्रियों को होता है, जो ब्याही हुई होती हैं और बाँझ
होती हैं। पति-शोकाकुल स्त्री को भी यह रोग हो जाया करता है।
इस रोग में दूध के साथ पान का रस मिलाकर देना बड़ा ही
लाभदायक है। अथवा बादाम को खूब महीन पीस कर दूध में
मिला दे और ऊपर से थोड़ा सा शुद्ध गुलाबजल डालकर पिलावे।
गर्भावस्था में स्त्रियों के मसूड़े और दाँत अक्सर दुखते हैं।
कितनी ही स्त्रियों का प्रत्येक गर्भ में एक दाँत गिरता जाता है।
इसका उपाय यह है कि जब दाँतों में दर्द जान पड़े तब रूई से
कान बन्द कर लेना चाहिये। यदि इससे अच्छा न हो तो लौंग के
तेल में रूई भिगोकर दाँत में रक्खे या मसूड़ों पर पोत दे। मसूड़ों
पर उसी समय लगाना लाभदायक होता है; जब मसूड़े में दर्द हो,
अन्यथा नहीं।
यदि मसूड़े में दर्द हो और पेट में गड़बड़ हो तो फौरन दवा
करनी चाहिये। सबसे पहले पेट को शुद्ध कर लेना चाहिये। पहले
कहा जा चुका है कि शोधे हुए रेंडी के तेल का जुलाब गर्भिणी
और बच्चे के लिए बड़ा ही उपयोगी है। इस लिए जरा भी पेट
की शिकायत मालूम होने पर उसे यही जुलाब लेकर पेट को साफ