रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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ही गला जा रहा है ।
९—डकारें बहुत आती हैं और पेट में मरोड़ हुआ करता है ।
आँतें सदा गड़गड़ाया करती हैं ।
१०—शरीर की सब नसें दुखती रहती हैं। कभी किसी जगह
पीड़ा रहती है, कभी किसी जगह ।
११—शरीर ऐंठ कर तन सा जाता है ।
१२—कभी-कभी सफेद पेशाब बहुत उतरता है ।
१३—किसी-किसी दिन पेट में अफरा जान पड़ता है और
वायु गड़गड़ा कर आँतों तक आ जाती है । इस समय कण्ठ भी
रुक सा जाया करता है । किसी दिन पेट इतना फूल आता है कि
गर्भ का सा मालूम होने लगता है ।
अच्छी पहचान इस रोग की यह है कि रोगी देव-मन्दिर आदि
में जाने से हिचकता है और यदि चला भी जाता है तो उसका
अपना कण्ठ घुटता सा और छाती गिरती सी जान पड़ती है ।
बाजा इत्यादि के शब्द सुनकर उसे मूर्छा आ जाती है अथवा वह
चिल्लाने लगता है । हवादार जगह में बैठने को जी चाहता है ।
यह रोग अधिकतर उन स्त्रियों को होता है जिनका गर्भ बार-
बार गिर जाता है या जल्दी-जल्दी सन्तान होती है या जिन स्त्रियों
को शोक अधिक रहता है । स्पष्ट रीति से यों समझना चाहिए कि
जिन कारणों से निर्बलता आती है उन्हीं कारणों से यह मूर्छा रोग
भी उत्पन्न होता है ।