रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३३१
मूर्च्छा रोग
यह रोग आधुनिक समय में बहुतायत से पाया जाता है ।
इसके लक्षण नाम ही से प्रकट हैं । किन्तु दुःख की बात है कि
आजकल लोग इसे भूत, प्रेत, असुर, चुड़ैल समझने लग गये हैं ।
यद्यपि यह भाव अब दिन पर दिन कम होता जा रहा है, तथापि
इसका प्रचार इतना बढ़ गया था कि अब भी ऐसे लोगों की संख्या
बहुत ही अधिक है । इस रोग के लक्षण ये हैं:—
१—सिर में भारीपन रहता है ।
२—आँखों की भौंहों में इतनी पीड़ा होती है, मानों कोई कील
ठोक रहा है । बिना कारण ही आँखों में आँसू भरे रहते हैं ।
३—मन सदा उदास रहता है, कोई काम करने का जी नहीं
चाहता ।
४—यदि पास में कोई न रहे, तो बहुत ही आराम मिलता
है । किसी से बातें करना जवाल मालूम होता है ।
५—कण्ठ रुक जाता है और उसमें गोला सा जान पड़ता है ।
इसी गोले के उठने से प्रतीत होता है कि मूर्च्छा आनेवाली है ।
६—हृदय में धड़कन हुआ करती है । साँस की गति भी तेज
पड़ जाती है ।
७—बायीं पसली में दर्द होता है ।
८—छाती में बहुत कष्ट मालूम होता है, मानों वहाँ का माँस