रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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गर्भाशय
योनि-मुख से मिला हुआ गर्भाशय होता है। वह वस्ति-गह्वर
में ही होता है। उसके सम्मुख मूत्र-स्थान और पीछे मल-स्थान होता
है। गर्भाशय के कुछ ही दूर पर दोनों डिम्ब ग्रन्थियाँ भी रहती
हैं। गर्भाशय की शक्ल नासपाती के समान होती है। किन्तु
उसका स्थूल भाग गोल होने की अपेक्षा कुछ चपटा होता है।
वस्ति-गह्वर में गर्भाशय सीधा खड़ा न रहकर मूत्राशय की
ओर झुका रहता है। गर्भाशय अन्दर से पोला रहता है और
उसमें भी जगह बहुत कम होती है। गर्भ धारण करने के पूर्व
गर्भाशय छोटा रहता है, किन्तु गर्भ स्थित हो जाने पर वह धीरे-
धीरे बढ़ जाता है। तीसरे महीने में टटोल कर देखने से प्रतीति भी
की जा सकती है। सामान्यतया गर्भाशय का दिग्दर्शन कराकर
अब रज और वीर्य पर विचार किया जायगा।
वीर्य की उत्पत्ति
मनुष्य-शरीर के सार-तत्त्व का नाम वीर्य है। वैद्यक शास्त्र ने
जीवन का मूल तत्त्व इस वीर्य को ही माना है। यह वीर्य आहार
का अन्तिम तत्त्व है। आयुर्वेद का मत है:—