रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३२६
प्रसूत ज्वर
यह ज्वर स्त्रियों को प्रसवकाल में असंयम के कारण होता है।
इसमें हड़फूटन होती है, प्यास अधिक लगती है, हरवक्त ज्वर
लगा रहता है, बारम्बार मल-त्याग करना पड़ता है, शरीर भारी
और गरम रहता है। इसके लिए पूर्व लिखित दशमूल का क्वाथ
सबसे अधिक लाभदायक है। अथवा, अजमोदा, जीरा, बंसलोचन
खैरसार, विजयसार, सौंफ, धनियाँ और मोचरस, इन सब चीजों
को बराबर-बराबर लेकर दो-दो तोले की दस पुड़िया बनाकर रख
दे। फिर एक पुड़िया प्रति दिन आधसेर पानी में औटाकर जब
छटाँक भर पानी रह जाय तब छानकर पिलावे। इस दवा का
दस दिन सेवन करने से प्रसूत-ज्वर समूल नष्ट हो जाता है।
यदि गर्भावस्था में ही ज्वर आवे तो रक्तचन्दन, दारवा,
गौरीसर, खस, मुलहठी, महुआ, धनियाँ, नेत्रवाला और मिश्री का
सम भाग लेकर उसका क्वाथ सात दिन तक पिलावे तो ज्वर का
आना बन्द हो जाता है। अथवा मुलहठी, लाल चन्दन, खस,
गौरीसर, कमल की जड़ छः-छः माशे लेकर काढ़ा बनावे और
उसमें शहद और मिश्री मिलाकर सात-आठ दिन तक पिलाने से
ज्वर दब जाता है।
गर्भिणी स्त्री के मस्तक में प्रायः झनझनाहट होती है और
मूर्च्छा सी हो जाया करती है। ऐसी दशा में गर्भिणी को चारपाई