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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 334, कुल 440 में से

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३२६ असली कोकशास्त्र
आधे कंडे जल जायँ तब उसमें और कंडे डालकर मिट्टी से आग
को ढंक देना चाहिए। आग देने से आठ पहर पीछे इसे निकाले ।
बाद इनको थूहर के दूध, बँगला पान के रस और भारंगी के रस
में क्रम से आठ-आठ पहर घोंटे। (रस में पानी या छिलका कुछ
भी न रहने पावे।) ज्यों-ज्यों रस सूखता जाय त्यों-त्यों उसमें
रस डालता जाय और खरल करता जाय। पश्चात् फिर मिट्टी के
बर्तन में रखकर ऊपर की भाँति फूँक दे और आठ पहर के बाद
उसे बाइर निकाल दे। पीछे उन्हें पीसकर शीशी में रखकर काग
लगा दे। यदि कमर में दर्द हो अथवा छाती या पेट में दर्द हो तो
छः माशे अदरख के रस में इसे तीन रत्ती डालकर देना चाहिये।
यदि कफ की खाँसो हो तो छः माशे अदरख का रस, छः माशे
शहद, आधी गाँठ छोटी पीपल पीसकर उसमें दो रत्ती यह दवा
मिलाकर दे। इसी प्रकार सन्निपात में छः माशे अदरख का रस
एक पीपल और तोन रत्ती यह दवा पीसकर दे तथा पैरों के तलवे
में अदरख का रस, लहसन का रस और अजवायन को गरम
करके मर्दन करे। सर्दी हुई हो तो तीन माशे शहद में दो रत्ती दवा
चटा दे। हिचकी आती हो तो तीन माशे शहद और तीन माशे
अदरख के रस के साथ डेढ़ रत्ती यह दवा मिलाकर चटावे। इस
प्रकार भिन्न-भिन्न अनुपान के साथ यह दवा देने से अनेक तरह के
रोगों से प्रसूता की मुक्ति होती है।
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