रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३२५
खोवा हो जाय, तब पावभर गाय का घी उसमें डालकर भूने। बाद
थाली में निकाल कर रख ले। फिर एक सेर चीनी की चाशनी
करके उसमें भुने खोवे को डाल दे और ऊपर से केशर छः माशे,
कस्तूरी डेढ़ माशे, भोमसेनी कपूर तीन माशे, पिस्ता चार तोला,
छिला बादाम आठ तोला छोड़कर लड्डू बना ले। प्रति दिन गरम
दूध के साथ एक तोला इसे खा लिया करे।
दूसरी विधी—पावभर बैतरा सोंठ का चूर्ण, दही चक्का आध
पाव, छोटी पीपल आधपाव, धतूरे के बीज आधपाव, इन सबको
हाँड़ी में रखकर उसका मुख मजबूती के साथ बन्द कर दे। एक
गढ़े में उसे रखकर ऊपर से कंडी रखकर आग लगा दे। जब वे
कंडे जलकर खाक हो जावें, तब राख को हटाकर फिर पूर्ववत्
कंडी रखकर सुलगा दे। इस प्रकार तीन बार करे। पश्चात् हाँडी
को खूब सावधानी के साथ निकाल कर बाहर कर ले और उसमें
से दवा निकाल कर शीशी में रख काग लगा दे। यह साधारण
मात्रा है। यदि इसको बहुत तीक्ष्ण करना हो तो इसमें सात-सात
पुट अदरख, बँगला पान के पत्ते का रस, थूहर के दूध के क्रम से
दे और फिर ऊपर की भाँति चौदह आँच दे।
तीसरी विधी—बैतरा सोंठ का चूर्ण पाव भर, आधा पाव सज्जी
और छटाँक भर लौंग को थूहर के दुध में पीसकर लुगदी बना ले
और मिट्टी के उतने ही बड़े बर्त्तन में इसे रखे, जिसमें अँट
जाय। बाद ऊपर की भाँति इसे गढ़े में रखकर फूँक दे। जब