रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 332, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें३२४ असली कोकशास्त्र
से सब तरह के प्रसूत रोग समूल नष्ट हो जाते हैं ।
७—प्रसूत रोग में यह दवा भी बड़ा लाभ पहुँचाती है । प्रसा-
रिणी को पाँच सेर पानी में औटावे । जब तीन सेर पानी रह जाय,
तब उतार कर छान ले । फिर इस क्वाथ में सोंठ, कालीमिर्च,
पीपल, पीपलामूल, चित्रक, सफेद जीरा, काला जीरा, शालपर्णी,
पृष्टपर्णी, मुग्दपर्णी, गोखरू, रायसन, रेंडी वृक्ष की छाल, खरेंटी,
सेंधा नमक, जवाखार और सज्जी इन सब चीजों को एक-एक
तोला लेकर लुगदी बना ले । ऊपर के काढ़े में इस लुगदी को सेर
भर घी ( गाय का ) डालकर पकावे । पक जाने पर उतार कर
छान डाले । इस घी के सेवन से प्रसूत, संग्रहणी आदि कई तरह के
रोग दूर होते हैं । इस घी के सेवन से प्रसूता की जठराग्नि प्रज्ज्वलित
होकर स्तनों का दूध शुद्ध हो जाता है । उदर-रोग भी इससे नष्ट
हो जाता है ।
८—सुहाग सोंठ, विषगर्भ तैल, अथवा मरीचादि तैल भी इस
रोग में बहुत ही फायदा करते हैं । इनके बनाने की रीति नीचे
लिखी जाती है:—
सुहाग सोंठ बनाने की विधि
बैंतरा सोंठ पावभर कूट-छानकर रख ले । बाद डेढ़सेर गाय
का दूध आँच पर चढ़ाकर औटावे ; जब वह जलकर आधा रह जाय,
तब उसमें सोंठ का चूर्ण डाल दे और बराबर चलाता रहे । जब