रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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असली कोकशास्त्र ३१६
सार करना चाहिए । सूर्य की धूप तथा आग का सेवन करना बड़ा
ही गुणकारी है ।
इस ऋतु में बर्फ, सत्तू, अत्यन्त वायु सेवन, खट्टे, कड़वे,
कसैले, शीतल तथा वातकारी पदार्थ नहीं खाना चाहिए । कसेरू,
सिंघाड़े, उर्द, आलू आदि का सेवन करना हानिकारक है ।
ऋतु के अनुसार आहार करने में एक बात का ध्यान और
रखना चाहिए । वह यह कि कभी-कभी ऋतु के विपरीत समय
रहता है, जैसे मौसम तो वर्षा का है, किन्तु हवा की अधिकता से
तथा अन्यान्य कारणों से सर्दी काफी पड़ने लगती है । ऐसी दशा
में आहार-विहार में परिवर्त्तन करना आवश्यक होता है ।
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