रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८ असली कोकशास्त्र
लेने से पित्त-जन्य रोगों के उत्पन्न होने की आशंका नहीं रहती ।
इन महीनों में भी, चीनी, मिश्री, जौ, गेहूँ, मूँग, चावल, गरम
दूध, आँवला, परवल, धनियाँ, कमलगट्टा, मुनक्का, नारियल, गुड़-
मिश्रित हड़का चूर्ण, गोभी आदि वस्तुएँ विशेष लाभ पहुँचाती हैं।
शिशिर
पोष और माघ ये दोनों महीने शीतल, स्निग्ध, प्रायः सब
पदार्थों को स्वादिष्ट करनेवाले तथा अग्नि को प्रज्ज्वलित करनेवाले
हैं। इन महीनों में कफ संचय होता है और बल की वृद्धि होती है।
शीत होने से वायु का कोप होता है। इस लिए इन महीनों में
चिकने, रूखे, खट्टे और नमकीन रसों का सेवन ही लाभदायक
है। सुश्रुताचार्य का कथन है:—
“ये दोनों महीने ठण्डे और रूखे हैं। इन महीनों में सूर्य्यताप
मन्द रहता है। हवा तेजी से चलती है। सर्दी के कारण वायु
कुपित होता है। वही वायु सर्दी लगने से कोष्ठ के भीतर पिंडिकासा
हो जाता है और शीघ्र रस को सोख लेता है। इस ऋतु में मधुर,
अम्ल, लवण तथा रस-युक्त पदार्थों का ही भोजन करना चाहिए।
इन महीनों में पौष्टिक, बलवर्द्धक, घी, दूध, मक्खन, मलाई, खाँड़ के
बने हुए पदार्थ अत्यन्त लाभदायक हैं। गेहूँ, उर्द, नये चावलों का
भात, शुद्ध और उत्तम बनी हुई मिठाइयाँ, पाक, बादाम, अखरोट
चिरौंजी, आदि पदार्थों का सेवन मनुष्य को अपनी शक्ति के अनु-