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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 440 में से

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पृष्ठ 328

३१४ असली कोकशास्त्र
व्यायाम और स्वच्छ वायु का सेवन (२) सादा तथा हलका
भोजन और निर्मल जल।" ऐसा कौन मूर्ख मनुष्य होगा जो
आरोग्य प्राप्ति के इन प्राकृतिक नियमों को छोड़कर वैद्यों और
डाक्टरों की तरह तरह की औषधियों का सेवन करके धन और
आरोग्य का नाश करेगा।
२३—ऋतु के अनुसार प्रत्येक मनुष्य को आहार-विहार
करना चाहिए। यह सौभाग्य भारतवर्ष को ही प्राप्त है कि यहाँ
ठीक समय पर गर्मी पड़ती है, ठीक समय पर वर्षा होती है और
ठीक समय पर सर्दी पड़ती है। पाश्चात्य देशों में यह बात नहीं
है। वर्ष में छः ऋतुएँ होती हैं, जिनका क्रम इस प्रकार है।
फाल्गुन और चैत—वसन्त ऋतु
वैशाख और ज्येष्ठ—ग्रीष्म ऋतु
आषाढ़ और श्रावण—वर्षा ऋतु
भाद्रपद और आश्विन—शरद ऋतु
कार्तिक और मार्गशीर्ष—हेमन्त ऋतु
पौष और माघ—शिशिर ऋतु
कुछ आचार्यों ने चैत्र-वैशाख को वसन्त ऋतु मानकर छहों
ऋतुओं का उल्लेख किया है; पर इस विपरीतता में कोई खास
बात नहीं है, अतः कुछ लिखने की आवश्यकता नहीं।
ऋतु के अनुसार आहार-विहार करने के लिए उनका ज्ञान