रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३१३
छिद्रों में प्रकृति ने बहुत से बालों की रचना की है । ये बाल हवा
में समन्वित धूलि के कणों को रोगजनक जन्तुओं को तथा ऐसे ही
दूसरे कचरे को फेफड़ों में जाने से रोकते हैं। यह रुका हुआ कचरा
जब मनुष्य वायु को बाहर निकालता है, तब बाहर निकल जाता
है। जो लोग नासिका के भीतर के बालों को कटवाते हैं, वे भारी
भूल करते हैं। इतना ही नहीं, नासिका में एक गुण और भी बड़ा
विचित्र है, वह यह कि शीतकाल में जब बिलकुल ठण्डी हवा
चलती है, तब उसे गर्म करके फेफड़े में पहुँचाती है। इससे फेफड़े
को किसी तरह की हानि नहीं पहुँचती है । किन्तु मुख द्वारा
श्वासन-क्रिया करने से ठण्डी हवा ज्यों की त्यों फेफड़े में जाकर
हानि पहुँचाती है। ठण्डी हवा पहुँचने से कभी कभी फेफड़ों में
सूजन हो आती है । हवा को शुद्ध करने के लिए नासिका एक
प्राकृतिक यन्त्र है, इसका सदा ध्यान रखना चाहिए ।
२०—काम-क्रोध-लोभ-मोह-मद-मात्सर्य आदि विकारों को
प्रतिक्षण दूर रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए और दया,
परोपकार, आदि गुणों को धीरे-धीरे अपने हृदय में भरने का प्रयत्न
करना चाहिए ।
२१—भोजन करने के बाद थोड़ा टहल कर चारपाई पर लेटा
करो, किन्तु तुरन्त ही नींद में अचेत न हो जाओ ।
२२—डाक्टर उडली का कहना है कि,—"आरोग्यता प्राप्त
करने के दो मार्ग हैं—(१) ग्राम्य-जीवन, उद्यान-भ्रमण, नियमित