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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 324, कुल 440 में से

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३१२ असली कोकशास्त्र
१५—थोड़ा-सा छाछ (मट्ठा) का सेवन करना बड़ा ही
लाभदायक है। वैद्यक ग्रन्थों में इसकी बड़ी प्रशंसा लिखी है।
स्वास्थ्य के लिए यह बड़ी ही उपयोगी वस्तु है।
१६—अपनी सुविधा के अनुसार ताजे और आरोग्य फलों
का सेवन किया करो।
१७—सबेरे कुछ रात शेष रहते ही उठने की आदत डालो।
शय्या से उठते ही परमात्मा का ध्यान किया करो। बाद शौचादि
से निवृत्त होकर व्यायाम करो। व्यायाम उतना ही करो, जितने से
थकावट न मालूम हो।
१८—चटपटी, मसालेदार और बाजार की बनी हुई चीजें
(मिठाई पूड़ी आदि) कभी मत खाओ।
१९—मुँह से कभी साँस मत लो। यदि इसकी आदत पड़
गयी हो तो शीघ्र इस दोष से अपना पिण्ड छुड़ाओ। मुँह से साँस
लेना बड़ा ही हानिकारक है। कारण यह कि मुँह के रास्ते से जो
हवा भीतर जाती है, वह छनकर नहीं जाती। अतः वायु में उड़ने
वाले अनेक सूक्ष्म तथा विषैले जीवाणु एवं समन्वित धूलि-कण या
ऐसा ही कोई दूसरा मल शरीर के भीतर चला जाता है जो कि
नाना प्रकार के रोग उत्पन्न करने का कारण होता है; किन्तु नासिका
द्वारा साँस लेने से उक्त चीजें नासिका-द्वार में ही अटक जाती हैं।
मुख द्वारा श्वासन-क्रिया करनेवालों के फेफड़े में रोगों को उत्पन्न
करनेवाले नाना प्रकार के परमाणु एकत्र हो जाते हैं। नासिका के