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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 323, कुल 440 में से

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और पसीने से बिलकुल साफ रक्खो। नदी के स्वच्छ जल में
स्नान करना सबसे उत्तम है।
८—अपने काम और मौसम के अनुसार हमेशा साफ और
ढीले कपड़े पहनो तथा हर मौसम में खुली हवा में मुख खोलकर
सोने के अभ्यासी बनो।
९—प्रतिदिन नियमित रूप से थोड़ा समय धूप में बिताओ।
और सूर्य से शक्ति लिया करो।
१०—सदा प्रसन्नचित्त रहो और चिन्ता आदि से दूर रहो।
किसी की बुराई मत करो और सृष्टि की प्रत्येक वस्तु से कुछ न
कुछ शिक्षा लेने की चेष्टा करो।
११—ब्रह्मचर्य से रहा करो। वेश्यागामी और पर-स्त्री-गामी
न बनो। इसी प्रकार से जो स्त्रियाँ स्वस्थ रहना चाहें वे पराये
पुरुष को बुरी निगाह से न देखें।
१२—नशे की चीजों से सदा दूर रहो। नशीली चीजों के
सेवन से फेफड़े खराब हो जाते हैं।
१३—भोजन करते समय जितना कम जल पी सको; उतना
ही अच्छा। भोजन करने के घण्टा आध घण्टा बाद इच्छा के
अनुसार जल पिया करो।
१४—प्रतिदिन शुद्ध गोदुग्ध का सेवन किया करो। एक
मनुष्य के लिए २४ घण्टे में सेर भर दूध पीना अत्यन्त
आवश्यक है।