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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 322, कुल 440 में से

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पृष्ठ 322

३१० असली कोकशास्त्र
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कर खाने से स्वस्थता कभी नहीं रह सकती । भोजन धीरे-धीरे
और खूब चबा-चबा कर करना चाहिए । एक ग्रास को चालीस
बार कुचल कर निगलना, पेट में अमृत डालने के समान गुण करता
है । इससे कई लाभ होते हैं । एक तो यह कि थोड़े आहार से
अधिक रक्त तैयार होता है और उस रक्त में किसी प्रकार का दोष
नहीं रहता और दूसरा लाभ यह होता है कि दाँत मजबूत होते
हैं । इस प्रकार चबाकर भोजन करने से पाचन क्रिया बहुत ठीक
काम करती है; मल की रुकावट कभी नहीं होती, चित्त प्रसन्न रहता
है, अच्छी भूख लगती है, पेट में कभी शिकायत नहीं पैदा होती ।
४—भोजन करने के पहले और पीछे हाथ, पैर तथा मुख का
धोना बड़ा ही हितप्रद है ।
५—मल-मूत्र के वेग को कभी न रोको । हमेशा पेट साफ
रक्खो । कबज कभी मत होने दो । यदि कभी इसकी शिकायत
जान पड़े तो फौरन यत्न करो ।
६—दाँत, मसूड़े और जीभ की हमेशा सफाई रक्खो । तथा
कोई ऐसी चीज न खाओ जिससे मुख में जलन पैदा हो । हाँ काली
मिर्च आदि खाने की बात दूसरी है; पर लाल मिर्च को भूलकर
भी मुख में नहीं डालना चाहिए ।
७—प्रति दिन सबेरे उठते ही मल-मूत्र त्याग करके मुख की
सफाई कर डालनी चाहिए । स्नान हमेशा ठण्डे पानी से तड़के कर
लेना बहुत ही लाभदायक है । शरीर की त्वचा को मैल-मिट्टी