रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३०८
पालन किया जाय और बालकों में आरम्भ से ही इन नियमों पर
चलने की आदत डाली जाय, तो जीवन विशेष सुख और शान्ति से
व्यतीत हो सकता है। बचपन में जिस बात की आदत पड़ जाती
है, वह कभी नहीं छूटती। स्वास्थ्य-रक्षा के साधारण नियम ऐसे
नहीं हैं, जिनका सरलतापूर्वक पालन न किया जा सके, किन्तु जब
मनुष्य की आदत कुछ और ही ढंग की हो जाती है, तब वे ही
सरल नियम पहाड़ से मालूम होने लगते हैं।
अब हम स्वास्थ्य-रक्षा के कुछ उपायों का उल्लेख यहाँ करेंगे,
जिनका पालन करना आलसी मनुष्य के लिए तो अवश्य ही दुरूह
है, पर और किसी भी मनुष्य के लिए कठिन नहीं है —
१—रहने का स्थान खूब हवादार होना चाहिए; किन्तु दूषित
और गन्दी हवा जरा भी न आने पावे। गन्दी हवा और गन्दा
पानी ही नाना प्रकार के रोगों का घर है।
२—अपना प्रत्येक कार्य नियमित समय पर करना चाहिए।
स्वास्थ्य के लिए अनियमित समय पर काम करना पूरा घातक
है। ऐसे आदमी कभी स्वस्थ नहीं कहे जा सकते जो एक दिन तो
तड़के मल-मूत्र त्याग कर निवृत्त हो जाते हैं और दूसरे दिन दोपहर
को टट्टी जाते हैं। इसी प्रकार उनका प्रत्येक कार्य होता रहता है।
ऐसे मनुष्य सम्भव है कि ऊपर से देखने में हृष्ट-पुष्ट और पूर्ण
दिखायी पड़ें, पर वास्तव में वे कदापि स्वस्थ नहीं हैं।
३—शुद्ध, सादा और थोड़ा भोजन करना चाहिए। ठूँस-ठूँस