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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 319, कुल 440 में से

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पृष्ठ 319

असली कोकशास्त्र ३०९
मनुष्य हो गये। छः महीने तक तो उनकी स्त्री ने खूब सुश्रूषा
की। बाद उसकी ओर से कुछ लापरवाही होने लगी। घर के और
लोग पहले ही से हाथ खींच बैठे थे। लगातार ग्यारह महीने तक
वह बीमार रहे। कितनी यातना सहकर उनका प्राण निकला,
उसका कारुणिक वर्णन करके पाठक-पाठिकाओं का दिल दुखाना
नहीं चाहता। तन्दुरुस्ती नष्ट होने पर उनकी लाखों की सम्पत्ति
किसी काम न आयी, इस बात की शिक्षा उक्त घटना से अच्छी
तरह मिल सकती है।
व्यायाम से शरीर में बल बढ़ता है और भीरुता दूर होती है।
मौका पड़ने पर दुष्टों के नीच शब्दों का जवाब लात-घूंसे से देने
का साहस होता है। जल्द किसी नीच की बुरी निगाह डालने की
हिम्मत नहीं पड़ती। इससे भोग-विलास की ओर रुचि नहीं बढ़ती
और सदा तबियत मस्त रहती है।
कसरत के द्वारा स्त्रियाँ अपने रूप-यौवन को अधिक दिनों तक
कायम रखकर अपने पति को प्रसन्न रख सकती हैं और पति की
प्रसन्नता से स्वयं भी प्रसन्न रहती हैं।
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