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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 318, कुल 440 में से

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पृष्ठ 318

३०४ असली कोकशास्त्र
व्यायाम से लाभ
ब्यायाम करने से स्त्रियों का स्वास्थ्य कभी बिगड़ने नहीं पाता
और किसी प्रकार का रोग होने की बहुत ही कम सम्भावना रहती
है। शरीर हल्का और सबल रहता है। भोजन अच्छी तरह हजम
होता है ।
मुख और शरीर की कान्ति हमेशा बनी रहती है । समय से
पहले बुढ़ापा पास नहीं फटकने पाता । कसरत न करने तथा संयम
न रखने के कारण आजकल युवावस्था में ही स्त्रियों के चेहरे पर
वृद्धावस्था झलकने लगता है, कपोल चिचुक जाते हैं, आँखें नीचे
धँस जाती हैं, मस्तक पर शिकन पड़ जाती है और अंग-प्रत्यंग में
शिथिलता आ जाती है। यदि स्त्रियाँ नियमित रूप से ब्यायाम
करें और संयम से रहें तो ऐसा कभी नहीं हो सकता ।
तन्दुरुस्ती ठीक रहने से प्रसव-वेदना बहुत ही कम होती है
तथा हृष्ट-पुष्ट और सुन्दर सन्तान पैदा होती है । सुखी जीवन
बनाने के लिए तन्दुरुस्ती का ठीक रहना सबसे अधिक आवश्यक
है । तन्दुरुस्ती पर ही दुनियाँ का सुख-दुख निर्भर है। पहले तन्दु-
रुस्ती, पीछे और सब । अमित धन हो, सुन्दर और शिक्षित परि-
वार हो, घर में दास-दासियों की भरमार हो, पर एक तन्दुरुस्ती न
हो तो सारी वस्तुएँ फोकी पड़ जायें । धन का उपभोग कौन कर
सकता है ? तन्दुरुस्त या स्वस्थ मनुष्य । परिवार का आनन्द कध