रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०२ असली कोकशास्त्र
का ब्यायाम करते समय यह धारणा रक्खो कि मेरे अमुक अंग में
शक्ति आ रही है। जैसे, साँस खींचकर छाती की कसरत करते
समय यह सोचो कि सीना चौड़ा और पुष्ट होता जा रहा है; हाथ
की कसरत (नं० १) करते समय यह सोचो कि मेरे हाथों में खूब
ताकत भर रही है; इसी प्रकार अन्यान्य अंगों के लिए समझो ।
४—सीधी खड़ी हो जाओ और दाहिने हाथ की मुट्ठी बाँध-
कर दाहिनी ओर उसे जमीन तक झुकाओ; इसी प्रकार बायें हाथ
को भी बायीं ओर झुकाना चाहिए। दस-बारह बार करते जाने से
कमर पतली, पुष्ट और लचकदार हो जाती है तथा पेट में चर्बी
नहीं बढ़ने पाती ।
५—चौरस जमीन पर बैठकर दोनों पैर सामने की ओर फैला
दो। बाद झुक कर दोनों हाथ से पैर के दोनों अंगूठे पकड़े। थोड़ी
देर के बाद छोड़ दो। ऐसा करने से पेट में कोई बीमारी जल्द नहीं
पैदा होती। सम्भव है पहले-पहल तुम पैरों के अंगूठे न पकड़
सको; इस लिए इसे त्याग न दो । अभ्यास करने से १५-२०
दिन में ही तुम आसानी से अंगूठे पकड़ने लग जाओगी । पेट में
दर्द होता हो ओर यह क्रिया की जाय तो तुरन्त ही पेट की पीड़ा
शान्त हो जाती है ।
६—प्रतिदिन कम से कम दस-बारह बार गर्दन को चारो ओर
फेरना चाहिए। इससे कण्ठ में कोई रोग नहीं होता, आवाज
रसीली हो जाती है और गर्दन में अपने-आप ही सुन्दरता आ जाती है।