रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 315, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३०१
मानो तुम ऊपर की कोई चीज पकड़ने के लिए प्रयत्न कर रही हो
इस समय दोनों पैर जुड़े रहें। पूरे तनाव के साथ दो मिनट तक
हाथ ऊपर उठाये खड़ी रहो; बाद धीरे-धीरे कड़ाई के साथ दोनों
हाथ के पंजों को कन्धे पर लाओ फिर बल डालते हुए उन्हें छाती
की सीध में ले जाओ और समेट कर पंजों को छाती पर लाओ;
पश्चात् दोनों हाथ नीचे गिराओ और तनाव के साथ ही पीछे की
ओर ले जाकर सीध में लाओ। इस प्रकार चार-पाँच बार करने से
भुजाएँ सुडौल और बलयुक्त हो जाती हैं।
२—दोनों पैर सटाकर एड़ियों को ऊपर उठाओ और पैरों के
पंजों पर शरीर का सारा भार लाद दो। पैरों को खूब तना रक्खो।
फिर पंजों से ही पाँच सात कदम आगे जाकर पीछे लौट आओ।
लेकिन जाने और लौटने में पैरों का तनाव जरा भी कम न होने
पावे। दो तीन बार प्रतिदिन ऐसा करने से पैर मजबूत हो जाते हैं
और जंघाओं में चिकनाहट आ जाती है। दो-तीन बार का मतलब
यह न समझो कि दिनभर में दो-तीन बार ऐसा करने के लिए कहा
जा रहा है बल्कि व्यायाम के समय में बतलाये क्रमों से कई बार
करने के लिए कहने कहने का तात्पर्य है।
३—साँस खींचकर छाती जितनी फूल सके उतनी उसे फुलाओ।
बाद कुछ देर तक यानी जितनी देर तक सांस को रोक रखने में
कष्ट न हो, उतनी देर तक रोके रहो और छोड़ दो। इस प्रकार
तीन-चार बार करो। इससे छाती चौड़ी हो जाती है। प्रत्येक अंग