रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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रिक्त थोड़ी देर तक नियमित रूप से केवल शरीर स्वस्थ रहने के
उद्देश्य से व्यायाम किया करें ।
स्त्रियों का व्यायाम पुरुषों के व्यायाम से भिन्न होना चाहिए ।
भिन्न क्यों होना चाहिए, विस्तार-भय से इस पर यहाँ विचार नहीं
किया जायगा; पर इतना तो अवश्य कहा जायगा कि दोनों कार्यों
में विभिन्नता होने के कारण व्यायाम-प्रणाली में विभिन्नता रखना
आवश्यक है । हमारी राय है कि स्त्रियाँ पुरुषों की भाँति दंड-बैठक
न करके तथा मुद्गर न फेरकर यदि निम्नलिखित तरीके से व्यायाम
करें, तो उनकी तन्दुरुस्ती के लिए बड़ा ही लाभ हो सकता है:—
जिस प्रकार बालक को दस वर्ष की अवस्था तक व्यायाम
करने के लिए इस प्रकरण में बतलाया गया है, उसी प्रकार बालि-
काओं को भी इस अवस्था तक वही व्यायाम करना चाहिए । हाँ,
बालकों की अपेक्षा बालिकाओं का दौड़ना-धूपना कम अवश्य होना
चाहिए । कारण यह कि उन्हें और काम भी सीखना रहता है ।
बालकों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए जितना समय मिलता है
उतना बालिकाओं को नहीं; इस लिए उन्हें अधिक समय व्यायाम
की ओर लगाकर और कामों से अनभिज्ञ नहीं रहना चाहिए।
ग्यारह की अवस्था से नीचे के व्यायामों को शुरू करना चाहिए ।
१—सबेरे शौचादि से निवृत्त होकर स्त्रियों को किसी एकान्त
और हवादार कमरे में नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए ।
सीधी खड़ी होकर दोनों हाथ ऊपर उठाओ; इस प्रकार उठाओ,