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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 312, कुल 440 में से

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२६८ असली कोकशास्त्र
साल से सोलह वर्ष की अवस्था तक स्वच्छ वायु सेवन और दौड़ने
की कसरत की ओर ध्यान देना चाहिए। इस अवस्था तक दण्ड-
बैठक करना अच्छा नहीं है। क्योंकि सोलह वर्ष तक शरीर की
नस नाड़ियाँ और हड्डियाँ बहुत कोमल रहती हैं; अन्य प्रकार के
व्यायाम (जैसे, दंड-बैठक आदि) से उन्हें रूढ़ नहीं बनाना
चाहिए। सोलह के बाद दंड-बैठक द्वारा कसरत करना उत्तम है।
यह व्यायाम-विधि पुरुषों के लिये है। स्त्रियों के लिए आगे चलकर
बतलाया जायगा। दंड बैठक ५० से १००-१२५ तक करना
चाहिए। यह संख्या पूर्ण युवक के लिए है। कुश्ती लड़ना सबसे
उत्तम व्यायाम है; क्योंकि इससे हड्डी-हड्डी पर यथेष्ट और उचित
जोर पड़ता है। वृद्धावस्था में दंड-बैठक का व्यायाम नहीं करना
चाहिए। इस अवस्था में अंग-प्रत्यंग ढीले पड़ जाते हैं, अतः
व्यायाम से उनको हानि पहुँचती है। हाँ अपनी शक्ति के अनुसार
प्रातः-सन्ध्या टहल कर परिश्रम कर लेना वृद्धों की स्वस्थता के
लिए भी अत्यन्तावश्यक है।
प्रारम्भ करते ही अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए। इससे
ज्वर उत्पन्न हो जाने की बहुत बड़ी सम्भावना बनी रहती है।
व्यायाम थोड़े से शुरू करके धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। यह नियम
स्त्री-पुरुष दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।
तेल की मालिश भी एक प्रकार का व्यायाम है। इससे खून में
गर्मी पैदा होती है। कड़वे तेल की मालिश सर्वोत्तम है। इसकी