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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 309, कुल 440 में से

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पृष्ठ 309

असली कोकशास्त्र २६१
घर की स्त्रियों को समझावें और उस पर उन्हें आरूढ़ करें । पुरुष
प्रोत्साहन के बिना स्त्रियों का इधर ध्यान देना असम्भव है । कारण
यह कि इस प्रथा का लोप हो जाने के कारण उनमें संकोच की
मात्रा इतनी अधिक हो गयी है कि वे व्यायाम कर ही नहीं सकतीं ।
अधिकांश स्त्रियाँ तो व्यायाम का नाम सुनते ही दिल्लगी समझ
बैठेंगी, “भला स्त्रियाँ कसरत करेंगी, कैसा अन्धेर है ! अब घोर
कलियुग छा गया, इसी से ऐसी उल्टी बातें लोग कहने लगे हैं ।”
जिस बात की या काम की मनुष्य की आदत नहीं रहती, उसके
करने में उसे स्वाभाविक ही बड़ा अनुकुस और संकोच मालूम
होता है ।
स्त्रियों के व्यायाम की बात सुनकर कितने ही लोग हँसेंगे और
कहेंगे कि क्या दंड-बैठक करना स्त्रियों को शोभा देगा ? असल
में तो दंड-बैठक करने के लिए कहा ही नहीं जा रहा है और यदि
कहा भी जाय तथा वे इसे करने भी लगें तो इसमें कुशोभा की
कौन-सी बात है । इस पर कुछ लोग यह कह सकते हैं कि जब
दंड-बैठक के लिये नहीं कहा जा रहा है, तब वे व्यायाम ही कौन-
सा करेंगी ? ऐसा कहनेवालों को यह मालूम ही नहीं है कि व्या-
याम किसे कहते हैं और वह कितने प्रकार का होता है ।
व्यायाम का अर्थ है—“नाना प्रकार के अंग-संचालन द्वारा
प्रत्येक अंग पर जोर डालकर परिश्रम करना और उन्हें सुदृढ़
बनाना । यह व्यायाम दो तरह का होता है । एक नियमित व्यायाम