रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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साहसी और निर्भीक थीं। महाराज दशरथ हार गये होते यदि
महारानी कैकेयी अर्धागिनी धर्म का पालन करते हुए उनके रथ का
सम्भार न कर सकी होतीं; झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के
वीरत्त्व से सारा संसार भली-भाँति परिचित है किन्तु क्या आज
एक भी स्त्री हमारे देश में ऐसी है जो आपत्तिकाल में कैकेयी की
भाँति अपने पति की सहायता कर सके ? क्या ऐसी भी कोई स्त्री
है जो देश की स्वतन्त्रता के लिए महारानी लक्ष्मीबाई की तरह
वीरतापूर्वक शत्रुओं का मुकाबला कर सके ? सम्भवतः यही उत्तर
मिलेगा कि, —नहीं।
यदि गम्भीरता के साथ विचार किया जाय कि हमारी गृह-
देवियाँ इस प्रकार पौरुषहीन क्यों हो गयीं, तो पता चलेगा कि
उनमें न तो विद्या है न शक्ति ही है। यही कारण है कि विधर्मी
उन पर दिन रात आक्रमण कर रहे हैं, उनके सब से प्यारे सतीत्व-
धर्म का अपहरण कर रहे हैं और वे बेचारी निस्सहाय होकर सब
कुछ सहन कर रही हैं। यदि उनमें अपनी रक्षा करने की बुद्धि
होती, यदि उनके शरीर में धर्म पर आक्रमण करनेवाले का सामना
करने के लिए बल होता तो किसकी हिम्मत पड़ती जो उनकी ओर
आँख उठाने का साहस करता ? किन्तु यह बात तबतक स्वप्नवत
ही रहेगी, जबतक स्त्रियाँ व्यायाम का महत्त्व न समझ जायँगी
और व्यायाम करके अपने आत्म-रक्षार्थ शरीर-बल न बढ़ावेंगी।
इसके लिए पुरुषों को चाहिए वे व्यायाम का महत्त्व अपने