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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 307, कुल 440 में से

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पृष्ठ 307

असली कोकशास्त्र २६३
जाता है ? प्रश्न बहुत ही ठीक है। वास्तव में ऐसा बहुधा देखने में
आता है कि विद्वानों के बच्चे मूर्ख औ मूर्खों के लड़के विद्वान
निकल जाते हैं। किन्तु यह बात भी ऊपर के कथन से विपरीत नहीं
है। गम्भीरता-पूर्वक विचार करने से मालूम होगा कि गर्भाधान
के समय माता-पिता में तथा उसके बाद् माता में वे बातें मौजूद
थीं जो बालक में पायी जाती हैं—चाहे माँ-बाप ने उनका पालन
जानकर किया हो अथवा बिना जाने; चाहे वे बातें किसी कारण-
वश उस समय उपस्थित हो गयी हों अथवा स्वाभाविक ही।
—:*:—
व्यायाम
जीवन को सुखी और स्वस्थ रखने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों को
व्यायाम अवश्य करना चाहिए। व्यायाम किये बिना शरीर स्वस्थ
नहीं रह सकता और शरीर अस्वस्थ रहने से पहले तो सन्तानो-
त्पत्ति होती ही नहीं और यदि होती भी है तो रुग्ण और अल्पायु।
उत्तम सन्तान पैदा करने की इच्छा रखनेवालों के लिये व्यायाम
एक बड़ी महत्त्वपूर्ण और प्रयोजनीय वस्तु है। दुःख की बात है
कि हमारे देश में स्त्रियों के व्यायाम की प्रथा बिलकुल ही लुप्त हो
गयी है। यही कारण है कि हमारी गृह-देवियाँ अपनी रक्षा स्वयं
न करके दूसरों के आश्रित रहती हैं। भारत का प्राचीन इतिहास
इस बात का साक्षी है कि पहले भारतवर्ष की देवियाँ कितनी