रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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लिए बेहुला अथवा सावित्री ने जिन कष्टों को स्वीकार किये थे,
उन्हें पढ़कर किस स्त्री का मन विस्मय और उच्च भावों से पूर्ण नहीं
हो उठेगा ? कोई तो पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए बन
गया है, कोई बाल्यावस्था में ही सर्वस्वत्यागी योगी होकर ईश्वरा-
राधन में प्रवृत्त हुआ है और किसी ने नाना प्रकार के ऐश्वर्य-प्रलो-
भनों को पैरों से ठुकरा कर पातिव्रत्य-धर्म का पालन करके जगत्
के सामने अपने को रख दिया है । किन्तु आजकल के उपन्यासों में
कहीं तो बहू ने अपनी सास को विष देकर निष्ठुरतापूर्वक मार डाला
है और कहीं सास ने ही बहू की हत्या की है । ऐसे वृत्तान्तों को
पढ़ने या सुनने से क्षणभर के लिए उत्तेजना या कष्ट हो सकता है,
किन्तु इनसे लाभ कुछ भी नहीं हो सकता । इस लिए स्त्री-समाज
को उत्तमोत्तम शिक्षाप्रद ग्रन्थों का अवलोकन करना चाहिए ओर
अच्छे-अच्छे उपाख्यानों को आपस में कहना-सुनना चाहिए ।
अब हम यहाँ पर थोड़ा-सा इस बात पर भी विचार करेंगे कि
स्त्री-शिक्षा किस ढंग की होनी चाहिए। वास्तव में यह विषय बड़ा
ही कठिन है। यहाँ की विद्वन्मण्डली अभी तक एक राय नहीं हो
सकी है। इस लिए अभी हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि स्त्रियों में
प्रत्येक विषय की साधारणतया जानकारी होनी चाहिए । जैसे,
गणित का साधारण ज्ञान भी होने से वे अपने बच्चों को हँसाते-
खेलाते, गिनती, पहाड़ा, सवैया, पौना, ड्योढ़ा, जोड़, बाकी आदि
जबानी पढ़ा सकती हैं, साथ ही छोटे-छोटे हिसाब भी बतला सकती