सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 302, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 302

२८८ असली कोकशास्त्र
रामायण और महाभारत के उपाख्यान हमारे देश की स्त्रियों
को अत्यन्त प्रिय हैं। इन दोनों को छोड़कर गार्हस्थ्य-धर्म की शिक्षा
देनेवाले ऐसे उत्कृष्ट ग्रन्थ इस देश में अन्य नहीं। सीता और
सावित्री के दुःख, दमयन्ती और चिन्ता का पातिव्रत्य एवं नाना
प्रकार के कष्टों के विवरण आँसुओं से लिखे गये हैं। इन कथाओं
को पढ़कर स्त्रियों का स्वाभाविक कोमल हृदय पिघले बिना नहीं
रहता। उपन्यासों के पढ़ने से भी कितनी ही बार कारुणिक घटनाओं
पर आँख से आँसु लुढ़क पड़ते हैं। किन्तु पौराणिक कथाओं और
वर्त्तमान उपन्यासों में अन्तर है। आधुनिक लेखक-मण्डली कहीं-
कहीं केवल पाठकों के मन में कष्ट को जागृत करने के लिए ही
किसी परिवार की घटना का वर्णन करते हैं, केवल दुःख-पूर्ण घट-
नाओं को पढ़कर मन में दुःख पैदा करने से क्या लाभ ? जिस
प्रकार छोटे लड़के उड़ने और फुदकने वाले जन्तुओं को पकड़ कर
उनके पंख और पैरों में खोदकर आमोद पाते हैं, आजकल के अधि-
कांश लेखक भी उसी प्रकार किसी सुन्दरी युवती या युवक के एक
दुःख से दूसरे दुःख में पड़ने के दास्तान को कारुणिक भाषा में
वर्णन कर सन्तुष्ट होते हैं। किन्तु इस प्रकार दुःखद घटनाओं से
क्या लाभ ? यदि धर्म के लिए अथवा किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के
लिए कोई आत्मोत्सर्ग करे और कष्ट भोगे, तब तो उस घटना से
पाठक-पाठिकाओं का मन समुन्नत होता है और हृदय में धर्मभाव
उत्पन्न हो जाता है, अन्यथा कुछ नहीं। स्वामी को प्राप्त करने के