रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २८५
में ही सोने लग गये ? तुम तो प्रलयकाल में सोया करते थे, फिर
यह क्या कह रहे हो ? क्या सृष्टि का काम करते-करते तुम्हें भी
थकायी आ गयी ? किन्तु वेद तो कहता है कि तुम सदा एक रस
रहते हो ? सब कुछ करते हुए भी अकर्त्ता हो ? जरा इधर भी
निगाहें फेरो लला ! देखो हिन्दू-समाज की दुर्दशा से, दुर्दशा की
भी दुर्दशा हो रही है— वह भी अब चिल्लाने लग गयी है ! यदि
तुम विश्राम ही करना चाहते हो तो करो विश्राम, मुझे कुछ नहीं
कहना है; पर एक बात इस अकिंचन की सुन लो ! यही कि यदि
तुम्हारी ऐसी ही इच्छा है तो प्रलय करके चैन से विश्राम करो,
व्यर्थ ही अपने सिर पर पहपट क्यों कराते हो ! तेज-स्वरूप
होकर डरो न नाथ ! अन्धकार तो तुम्हारे दृष्टि-निक्षेप से ही भाग
जायगा । तनिक अपने वचन की ओर निगाहें फेरो:—
यदा यदाहि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥
—श्रीमद्भगवद्गीता
कहो, अब इससे बढ़कर उपयुक्त समय और कौन सा आवेगा ?
बता दो न ? भारतीय देवियाँ अज्ञता के कारण नाना प्रकार की
यन्त्रणायें भोग रही हैं, बाल-विवाह, वृद्ध-विवाह तथा बेमेल विवाह
का दमन-चक्र जोरों से चारों ओर चल रहा है, दुराचार का प्रचंड