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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 298, कुल 440 में से

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पृष्ठ 298

२८४ असली कोकशास्त्र
शक्ति उठा न रक्खें। पुरुष सन्तान-पालन विधि को जानते हुए भी
लापरवाही कर सकता है, पर स्त्री ऐसा कभी भी नहीं कर सकती,
यह निश्चय है।
हाय ! सन्तान-पालन ही स्त्रियों का मुख्य कर्त्तव्य है और उसे
ही वे अबलायें नहीं जानतीं। एक वंगीय विद्वान ने लिखा है:—
“मातृत्व ही नारी-जीवन का प्रधान उद्देश्य और चरम लक्ष्य है।
उनके लिए सबसे बढ़कर गौरव की बात यही है कि वे मातायें हैं।
गर्भ-धारण तथा सन्तान-पालन से बढ़कर महत्त्वपूर्ण कार्य नारी-
जीवन के लिए दूसरा नहीं है; क्योंकि इन्हीं दो बातों से सृष्टि की
रक्षा होती है। इसीसे इनका महत्त्व और गौरव भी अधिक है।
किन्तु खेद के साथ कहना पड़ता है कि हिन्दू-जाति आज
अपनी कन्याओं को इस योग्य होने ही नहीं देती कि वे समय आने
पर सच्ची माताएँ बन सकें और माता की तरह जीवन यापन कर
सकें। क्या यह समाज के लिए अत्यन्त लज्जा की बात नहीं है ?
नाथ ! प्रभो !! भगवान !!! वह दिन कब आवेगा, जब हिन्दू जाति
को अपनी यह भद्दी भूल स्पष्ट रीति से दिखलायी पड़ेगी, और वह
इस त्रुटि को दूर करने के लिए स्त्री-शिक्षा प्रचार करने में जी-जान
से, कमर कसकर तैयार होगी ? क्या देश की दुर्दशा की आह भरी
पुकार तुम्हारे कानों तक अभी भी नहीं पहुँची ? कितना सतावोगे
जगदीश्वर ! तुम्हारे इस प्रकार सोते रहने से इस अनाथ देश की
रक्षा कौन करेगा दीनबन्धु ! क्या कलि के प्रभाव से तुम भी असमय