रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २ : ३
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् ।
स्माइल्स ने लिखा है कि,—“भावी सन्तान की स्वास्थ्यरक्षा
का भार ईश्वर की ओर से खियों को ही सौंपा गया है। शारीरिक
स्वास्थ्य में ही चरित्र-बल और मानसिक शक्ति की पवित्रता
निहित है ।
किन्तु आज ऐसी कितनी खियाँ हैं जो ईश्वर की ओर से सौंपे
गये इस भार को वहन करने में समर्थ हैं ? वे इस बात को जानतीं
ही नहीं कि किस प्रणाली से सन्तान का पालन तथा उनकी शिक्षा
का विधान होना चाहिए । इस लिए कभी-कभी अपनी सन्तान की
भलाई करती हुई भी वे अपनी अनभिज्ञता के कारण उसकी बुराई
कर डालती हैं। सभी माताएँ यह चाहती हैं कि हमारे बच्चे
सुन्दर हों, दस में गिने जाने के लायक हों, दीर्घजीवी हों । इसके
लिए अपनी-अपनी विद्या-बुद्धि के अनुसार वे कोई यत्न उठा भी
नहीं रखतीं; किन्तु जिस बात को वे स्वयं नहीं जानतीं, उसमें वे
बेचारी क्या कर सकती हैं ? अपनी इस अनभिज्ञता के कारण
आज वे भी महान दुःख भोग रही हैं। एक तो नासमझी के कारण