रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८२ असली कोकशास्त्र
सुधारक चिल्लाते चिल्लाते अपने जीवन की आहुति दे रहे हैं, लेखक-
गण लेखनी रगड़ते-रगड़ते आँखें फोड़ रहे हैं; किन्तु फल कुछ भी
नहीं होरहा है। कारण ? कारण यही कि स्त्री-शिक्षा का अभाव !
यदि आज हमारी मातायें शिक्षिता होतीं, तो यह अनर्थ कभी न
होता। क्योंकि वे बचपन से बच्चों को उचित शिक्षा देतीं जिससे
स्वाभाविक ही सब लोग सदाचारी और कर्त्तव्यपरायण होते । 'न
रहता बाँस और न बजती बाँसुरी ।' फिर न तो ऐसे नीचतापूर्ण
कार्य ही होते और न उनके सुधारने की आवश्यकता ही पड़ती ।
बच्चे अपनी माता की देख-रेख में ही अधिक रहते हैं। उनकी
देखभाल जितनी माता कर सकती है, उतनी और कोई नहीं कर
सकता। माताओं की अशिक्षा के कारण बच्चे अपनी तबीयत के
अनुसार खेलते-कूदते और कुसंगति में पड़कर बुरी आदतें डाल
लेते हैं। माताएँ उधर ध्यान नहीं देतीं। यदि उनमें शिक्षा की
कमी न होती और सन्तान-शिक्षा आदि की विधियाँ वे जानती
होतीं तो इस ओर उनका पूरा ध्यान रहता। हरवक्त बच्चों पर
कड़ी नजर रखतीं और अपने पास उन्हें बैठाकर अच्छी-अच्छी
बातों की शिक्षा देतीं। उस अवस्था में बचपन से ही प्रत्येक जीवन
आदर्श के साँचे में ढला हुआ निकलता और एक अपूर्व ही दृश्य
दिखलायी पड़ता। तब न तो देश में इतना दुराचार ही फैला हुआ
दिखलायी पड़ता और न इस प्रकार के शक्तिहीन और अल्पायु
मनुष्य ही होते। महाकवि कालिदास ने लिखा है—