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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 440 में से

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पृष्ठ 295

असली कोकशास्त्र २८१
उत्तम सन्तानोत्पत्ति के लिए स्त्री
शिक्षा का प्रयोजन
उत्तम सन्तान पैदा करने तथा बालकों को उत्तम शिक्षा देने
के लिए स्त्री-शिक्षा की बहुत बड़ी आवश्यकता है। क्योंकि यह बात
पहले ही लिखी जा चुकी है कि शिशु के लिए माता ही आदि गुरु
है, और शिशु एक बार सबको होना पड़ता है, बाद लोग अन्यान्य
अवस्थाओं में प्रवेश करते हैं, इस लिए माता ही जगत् की आदि
गुरु है। यह कितने दुःख की बात है कि हमारे देश की माताएँ
बिलकुल अशिक्षिता हैं। जिस स्त्री-जाति के ऊपर इतनी बड़ी
जिम्मेदारी है, जो स्त्री-जाति अपने गुण और दोष से समूचे देश को
आनन-फानन समुन्नत और पवित्र बना सकती है, उसकी आज कैसी
शोचनीय दशा हो रही है कि सोचकर हृदय हिल जाता है। गुरु
के अनभिज्ञ होने पर शिष्य के पण्डित होने की आशा करना दुराशा
नहीं तो और क्या है ? यदि आज हमारे देश में स्त्री-शिक्षा का
काफी प्रचार होता, स्त्रियाँ शिक्षिता होतीं, अपने दायित्व को सम-
झती होतीं तो देश की इतनी पतित और घृणित दशा कदापि न
होने पाती। उन्हीं के मूर्खा होने के कारण आज चारों ओर स्कूलों
में, कालेजों में, घरों में, शहरों में, गाँवों में, खेतों में, कारखानों में,
राह में, तीर्थों में, धर्मशालाओं में सब जगह पापाचार हो रहा है।