रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २७६
शास्त्र पर, पदार्थ-विज्ञान की शिक्षा देनी हो तो पदार्थ विज्ञान पर,
खगोल विद्या का धुरन्धर बनाना हो तो खगोल विद्या पर, इति-
हासज्ञ बनाने की रुचि हो तो इतिहास पर, रसायन-शास्त्र का ज्ञाता
बनाना हो तो रसायनशास्त्र पर, आध्यात्मिक शिक्षा देनी हो तो
आध्यात्म-विषय, आयुर्वेद की शिक्षा देनी हो तो आयुर्वेद पर,
योद्धा बनाना हो तो वीरतापूर्ण घटनाओं पर, कृषि-विद्या में प्रवीण
बनाना हो तो खेती के विषय पर ही गर्भिणी को बातें करनी चाहिए,
उसी विषय का चिन्तन करना चाहिए और उसी विषय में मन
लगाना चाहिए ।
यदि गर्भिणी स्त्री शान्ति के साथ रहे, कभी किसी से झगड़ा
न करे, क्रोध न करे, बुरा भाव मन में फटकने न दे, ईश्वर को
समूचे विश्व-ब्रह्मांड का रचयिता और जीवमात्र में शक्ति प्रदान
करनेवाला समझ कर उस पर पूर्ण भक्ति रक्खे, किसी तरह की
कठिनाई पड़ने पर घबड़ा न जाय, हमेशा सत्य बोले, मन में किसी
तरह का कपट छल न रक्खे, झूठ न बोले, प्राणिमात्र पर दया
भाव रक्खे, दीन-दुखियों के प्रति सहानुभूतिसूचक शब्द मुख से
निकाले; कभी किसी को कोई कड़ी बात न कहे, दूसरों की भलाई
करने में सदा तत्पर रहे, गर्भ की रक्षा करते हुए परिश्रम से मुख
न मोड़े, किसी काम में आलस्य न करे, सदा प्रसन्नचित्त रहे,
कृपणता न करे, किसी काम में व्यर्थ खर्च न करे, बड़ों का हमेशा
आदर करे, यदि कोई कुछ कह दे तो प्रसन्नतापूर्वक उसे सहन कर