रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८० असली कोकशास्त्र
ले—प्रत्युत्तर में कोई कड़वी बात न कहे, हँसी-दिल्लगी में समय
न बितावे, गम्भीरता से रहे, अधिक व्यसन न करे, सादगी से
रहने में ही अपना गौरव समझे, सदा स्वच्छ रहे, पहले हानि-
लाभ को सोच लिया करे पीछे उस काम को करे, लकटा न लगावे,
स्वदेश, स्वजाति, और स्वकुटुम्ब पर प्रेम रक्खे, चापलूसी न करे,
हर काम में और हर बात में संतोष रक्खे, सदा निर्भीक रहे, सच
बोलने में किसी से न डरे, प्रति दिन सोते जागते ईश्वर का स्मरण
किया करे, प्रत्येक कार्य को नियमित समय पर किया करे,
सात्विक भोजन करे, गन्दे गीत और गन्दी बातें न तो कभी अपने
मुख से निकाले और न कान से सुने, ओछी और तुच्छ बातों पर
ध्यान न दे, सदा ऊँचे ऊँचे विचारों पर मन लगावे, कभी किसी
काम से हताश न हो, अपने मन में बड़े से बड़े काम को बिना
किसी की सहायता के कर डालने की हिम्मत रक्खे, जो काम
सामने आये उसे पूरा करके छोड़े, अपने को तुच्छ न समझे किसी
बात का घमंड न करे, जो बात कहे, उसका पालन करे, तथा सब
के साथ मित्र व्यवहार रक्खे, तो अवश्यमेव उसका बालक सर्व-
गुणसम्पन्न, माता-पिता पर भक्ति रखनेवाला, और देश में
कीर्ति फैलानेवाला, हो सकता है। उक्त बातों पर पूर्ण रीति से
ध्यान देना और तदनुकूल चलाना ही गर्भस्थ बालक को शिक्षा
देना है।
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