रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ असली कोकशास्त्र
सिद्ध बात है। प्रकृत-जीवन ही यथार्थ जीवन का नाम है। जहाँ
असली जीवन है वहीं सुख सम्पत्ति अधिवास करती है, अन्यथा
रुग्ण अवस्था में जैसा आज सार्व-भौम दुःख दिखायी देता है,
उसका चित्र-पट स्पष्ट ही है।
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पुरुष-जननेन्द्रिय
पुरुष-जननेन्द्रिक संबंधि-ज्ञान प्रत्येक मनुष्य के लिये आवश्यक
है। शरीर से मूत्र और वीर्य निकलने का मार्ग एक ही होता है।
लिंग के अग्र भाग में एक आवरण चमड़ा होता हैं, जिससे लिंग
की सुपारी ढकी रहती है। वह चमड़ा बराबर आगे-पीछे हटाया-
बढ़ाया जा सकता है। माता या दाइयों की असावधानी के कारण
बचपन में यदि वह हटाया-बढ़ाया नहीं जाता, तो वह इतना तंग
हो जाता है कि मूत्र निकलने में भी तकलीफ पहुँचाने लगता है और
कभी-कभी यहाँ तक देखा गया है कि वह सड़ जाता है। इन
दोनों हालतों में डाक्टर से आपरेशन कराना पड़ता है। उस चमड़े
के नीचे और सुपारी की जड़ में प्रायः सफेद रंग का कीट जम
जाता है। उसको हमेशा साफ करते रहना चाहिये। उसकी सफ़ायी
न रखने से बुद्धि-मन्दता और स्वप्नदोष की बीमारी हो जाती है।
इस इन्द्रिय में बेलनाकार तीन डंडे होते हैं। इन तीनों डंडों में