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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 288, कुल 440 में से

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२७६ असली कोकशास्त्र
साथ लड़ाई पर गयी थी। दिनभर युद्ध करने के बाद जब उसके
पति आते थे, तब वह लड़ाई का सारा हाल पूछा करती थी।
इस प्रकार वह अपने पति के मुख से युद्ध-क्षेत्र की वीरता-पूर्ण
घटनाओं को बड़े प्रेम से सुना करती थी। इन बातों को देखते हुए
कौन कह सकता है कि माता के कार्यों का प्रभाव गर्भस्थ बालक
पर नहीं पड़ता ?
सन्तान के लिए माता का उदर महाविद्यालय के समान है।
अथर्व वेद में लिखा है:—
ब्रह्मचारी जनयन्ब्रह्मागोलोकप्रजापतिं परमेष्ठिनं
विराजम् । गर्भो भूत्वामृतस्ययोना विन्द्रोहंभूत्त्वास-
सुरांस्ततर्ह ॥
जो ज्ञानामूल के केन्द्र-स्थान में गर्भरूप रहकर ब्रह्मचारी हुआ,
वही ज्ञान, कर्म, जानता, प्रजापालक राजा और विशेष तेजस्वी
परमात्मा को प्रकट करता हुआ इन्द्र बनकर अवश्यमेव राक्षसों
का नाश करता है।
अस्तु ; इस विषय पर एक नहीं सैकड़ों-हजारों उदाहरण दिये
जा सकते हैं कि गर्भस्थ बालक पर कैसा-कैसा प्रभाव पड़ा है और
पड़ता है ; किन्तु अधिक प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं। यहाँ पर
एक बात का और ध्यान रखना चाहिए। वह यह कि जिस प्रकार
उत्तम शिक्षाओं का प्रभाव गर्भस्थ बालक पर पड़ता है, उसी प्रकार