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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 287, कुल 440 में से

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पृष्ठ 287

असली कोकशास्त्र २१५
चले गये । अन्त में उस स्थल पर मारे गये, जिस स्थल का वर्णन
उनके पिता अर्जुन से उनकी माता नहीं सुन पायी थीं । गर्भ के
बच्चों पर इतना प्रभाव शिक्षा का पड़ता है ।
प्राचीन समय में हमारे देश की देवियाँ जिस ढंग के बच्चे
पैदा करना चाहती थीं, उसी ढंग का बालक पैदा करती थीं । ऐसे
बहुत से उदाहरण हमारे प्राचीन ग्रन्थों में पाये जाते हैं कि एक ही
माता ने अपने एक बच्चे को सर्वस्वत्यागी बनाया, दूसरे को नीति-
कुशल बनाया और तीसरे को शिल्प-कला में दक्ष ! वे माताएँ
जिस गुण वाली सन्तान पैदा करना चाहती थीं, गर्भ धारण करने
पर मनोयोगपूर्वक उसी विषय की बातें सुन, समझ, पढ़ और
विचार कर गर्भ के बालक पर प्रभाव डालती थीं ; किन्तु दुःख है
कि आज हमारी माताओं में वे बातें नहीं रह गयीं ओर न उक्त
विषय की जानकारी ही रह गयी ।
नैपोलियन बोनापार्ट कितना बड़ा बहादुर था, यह सब लोग
जानते हैं । जब वह अपनी माता के उदर में था, तब उसकी माँ
प्लूटार्क की लिखी हुई जीवनियों और ओसियन वीर-साहित्य को
मन लगाकर बड़े चाव से पढ़ा करती थी । उसकी माँ तेज घोड़े
की सवारी करती, घोड़े तथा अपने पति के अधीन सैनिकों पर रानी
की तरह हुकूमत करती और उन्हें अधिकार में रखती थी । क्या
उसके इन कार्यों का प्रभाव उसके गर्भस्थ बच्चे पर न पड़ा होगा ?
जिस समय नैपोलियन गर्भ में था, उसकी माँ अपने पति के