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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 286, कुल 440 में से

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२७४ असली कोकशास्त्र
की बातें सुनने से प्रसूता शान्ति-लाभ नहीं कर सकती, जिससे
बहुत सी लक्षित तथा अलक्षित बुराइयाँ पैदा होती हैं। इस लिए
सूतिका घर में अधिक स्त्रियों को फालतू कभी न रहने देना चाहिए
और न तो किसी को व्यर्थ की गप्पें मारने के लिए ही स्वतन्त्रता
दे रखनी चाहिए। क्योंकि ये दोनों ही विशेष हानिकारक हैं। इस
समय प्रसूता का शान्त और सात्विक भाव रखना बहुत ही
आवश्यक है। इससे बच्चे पर बड़ा ही सुन्दर प्रभाव पड़ता है।
कोई यह न समझे कि बच्चे इस वक्त कुछ सीखते ही नहीं।
—:०:—
गर्भ में बालक को शिक्षा
यह बात पहले कही जा चुकी है कि माता जैसा आचरण
करती है, वैसा प्रभाव गर्भस्थ बच्चे पर पड़ता है। गर्भ में बालक
को माता जितनी शिक्षा दे सकती है और उस शिक्षा का जितना
असर पड़ सकता है, उतनी न तो और समय में शिक्षा ही मिल
सकती है ओर न उसका उतना असर ही पड़ सकता है। देखिये,
जब अभिमन्यु गर्भ में थे, तब अर्जुन ने उनकी माता से चक्रव्यूह
वर्णन किया था। पूरा वर्णन वह नहीं कर पाये थे कि वे गहरी नींद
में सो गयीं। परिणाम यह हुआ कि चक्रव्यूह के युद्ध में जहाँ बड़े
बड़े योद्धा हृदय में हार मानकर भययुक्त हो गये, वहाँ कुमार
अभिमन्यु बड़ी वीरता के साथ लड़े ओर फाटक पर फाटक जीतते