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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 282, कुल 440 में से

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२७० असली कोकशास्त्र
वायु नहीं बढ़ पाती और शरीर में बल खूब बढ़ता है । दस दिन
बीत जाने पर तेल मलकर सबेरे गरम जल से प्रसूता को स्नान
करा देना चाहिए । इससे किसी तरह की हानि नहीं होती पर
लाभ होता है ।
प्रसूता को दस दिन तक बत्तीसा काढ़ा डालकर औटाया हुआ
पानी पीना चाहिए । ये बत्तीसों चीजें पंसारियों के यहाँ मिलती
हैं—जोकि बहुत ही गुणकारी हैं। उन बत्तीस चीजों में से यदि
इन चीजों का ही पानी बनाकर दिया जाय तब भी कोई हर्ज नहीं—
१-अजवायन दो तोला, २-सोंठ एक तोला, ३-लौंग तीन माशा,
४-पीपल तीन माशा, ५-पीपलामूल तीन माशा, ६-जावित्री डेढ़
माशा, ७-जायफल डेढ़ माशा, ८-कमरकस छः माशा, ९-लोध
छः माशा, १०-हल्दी छः माशा, ११-अम्बाहल्दी छः माशा,
१२-सुपारी के फूल छः माशा, १३-असगन्ध छः माशा, १४-मेदा
लकड़ी छः माशा, १५-कत्था तीन माशा, १६-माजूफल तीन माशा
१७-केशर डेढ़ माशा, १८-चिकनी सुपारी एक, १९-सनाय डेढ़
माशा, २०-मँजीठ तीन माशा, २१-झाड़ी बेर की जड़ एक तोला,
इन सबको जौकुट करके एक पोटली में बाँध दे । मिट्टी के बड़े
बर्तन में १५-२० सेर पानी भरकर आग पर चढ़ा दे और उसमें
उक्त पोटली डालकर पकावे, बाद यही पानी प्रसूता को पिलावे ।
यदि ये चीजें भी न मिलें या मौके पर उपस्थित न हों तो—पीपल,
पीपलामूल, गजपीपल, मोचरस, चीता, सोंठ और गुड़ इन्हीं चीजों