सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 281, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 281

असली कोकशास्त्र २१६
अच्छे वैद्य से उपाय पूछना चाहिए। क्योंकि इस समय मूत्र-त्याग
करना प्रसूता के लिए बहुत ही आवश्यक है। इस समय पेशाब न
उतरने से रोग उत्पन्न हो जाता है। प्रसूता को मल-त्याग भी कराना
चाहिए। यदि मल न गिरे तो रेंड़ी के तेल में या दूध में सनाय
या और कोई हल्के विरेचन की चीज औटाकर देना चाहिए।
सौर के घर में राई, सफेद सरसों, नीम के पत्ते या इसबन्द
की धूनी देनी चाहिए; किन्तु इतना धुआँ न करना चाहिए कि
बच्चे या प्रसूता की आँखें दुखने लगें। प्रसूता तथा उसके व्यव-
हार के कपड़ों में भी यह धुआँ देना आवश्यक है। बहुधा स्त्रियाँ
प्रसूता की चारपाई के नीचे धधकती हुई आग रख देती हैं—चाहे
गर्मी हो या बरसात। इससे प्रसूता को तो कम, पर नाजुक बच्चे
को बड़ा कष्ट होता है। इस लिए ऐसा कभी न करना चाहिए।
कहीं-कहीं बच्चा पैदा होने के पाँच छः दिन बाद ही स्नान
करा दिया जाता है। यद्यपि स्वास्थ्य के लिए स्नान बहुत ही लाभ-
दायक काम है; तथापि प्रसूता के लिए दस-बारह दिन से पहले
स्नान कराना लाभदायक है, यह नहीं कहा जा सकता। इतने शीघ्र
स्नान कराने से प्रसूता को ज्वर होने तथा सर्दी लगने की सम्भावना
रहती है—जोकि इस समय के लिए घातक है। यदि स्वच्छता
रखना हो तो और ढंग से रक्खे, स्नान न करावे। चालीस दिन
तक प्रसूता के शरीर में प्रतिदिन तैल-मर्दन करना चाहिए। यदि
लाक्षादि तेल मला जाय तो और भी उत्तम हो। क्योंकि इससे